मुझे गिरने की आदत है।
फिर दोबारा उठने की भी आदत है।
कितनी ही बार मुझे श्रद्धांजलि दी जा चुकी
लेकिन अपनी राख़ से उठता हूँ हर बार
जब जब लिखी गयी मेरी शहादत है।
फिर दोबारा उठने की भी आदत है।
कितनी ही बार मुझे श्रद्धांजलि दी जा चुकी
लेकिन अपनी राख़ से उठता हूँ हर बार
जब जब लिखी गयी मेरी शहादत है।
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