शब्दों का ये ज़ाल है ;
कभी ख़ुशी, कभी मलाल है |
कभी सारी मुश्किलों का हल ;
तो कभी मीलों पसरा सवाल है |
कभी आज़ादी का अहसास है ;
कभी दुविधा मे अटकी साँस है |
कभी दबे पांव सरपट निकली ;
तो कभी बेबाक बिन्दास है |
कभी कभी तो ये ऐसे खोती ;
कहना हो कुछ और कुछ होती |
फिर लाख मना लो, मिन्नतें करो ;
ज़ज्बातों को धोखा देती |
पर शब्द बिना क्या बोलोगे ?
कैसे अपना दिल खोलोगे ?
ज़ज्बात मौन हो जायेंगे ;
कैसे इज़हार हो पायेंगे |
कोई हँसे, कोई परिहास करे ;
लिखता जा जो अहसाह करे |
जिस पल तू चुप हो जायेगा ;
सांसे चले पर तू मर जायेगा |
लिखना, कहना बस ज़ारी रख ;
रहे प्रखर-मुखर वो तैयारी रख |
कभी ख़ुशी, कभी मलाल है |
कभी सारी मुश्किलों का हल ;
तो कभी मीलों पसरा सवाल है |
कभी आज़ादी का अहसास है ;
कभी दुविधा मे अटकी साँस है |
कभी दबे पांव सरपट निकली ;
तो कभी बेबाक बिन्दास है |
कभी कभी तो ये ऐसे खोती ;
कहना हो कुछ और कुछ होती |
फिर लाख मना लो, मिन्नतें करो ;
ज़ज्बातों को धोखा देती |
पर शब्द बिना क्या बोलोगे ?
कैसे अपना दिल खोलोगे ?
ज़ज्बात मौन हो जायेंगे ;
कैसे इज़हार हो पायेंगे |
कोई हँसे, कोई परिहास करे ;
लिखता जा जो अहसाह करे |
जिस पल तू चुप हो जायेगा ;
सांसे चले पर तू मर जायेगा |
लिखना, कहना बस ज़ारी रख ;
रहे प्रखर-मुखर वो तैयारी रख |