हवा में तैरते नन्हें नन्हें ;
सतरंगी आभा में लिपटे।
हरे गुलाबी कुछ नीले से ;
बुलबुले ये चमकीले से।
ऐसे ही कुछ ख्वाब हैं मेरे ;
कितने जाने सपने मेरे।
मेरी ऑंखें भी झिलमिल हैं ;
उम्मीदें उनमें उज्जवल हैं।
नाज़ुक वो भी इनके जैसी ;
उड़ने को बिलकुल मचली सी।
बिना हवा न ये उड़ पाएंगी ;
मंज़िल से न जुड़ पाएंगी।
मृदु बयार इन्हें तुम देना ;
अदृश्य होकर भी थामे रहना।
साथ तुम्हारा मिला चले तो ;
मैं भी मंज़िल को छू लूंगी।
मेरे ह्रदय में तुम रह लेना ;
तेरे सपनों में मैं जी लूंगी।
सतरंगी आभा में लिपटे।
हरे गुलाबी कुछ नीले से ;
बुलबुले ये चमकीले से।
ऐसे ही कुछ ख्वाब हैं मेरे ;
कितने जाने सपने मेरे।
मेरी ऑंखें भी झिलमिल हैं ;
उम्मीदें उनमें उज्जवल हैं।
नाज़ुक वो भी इनके जैसी ;
उड़ने को बिलकुल मचली सी।
बिना हवा न ये उड़ पाएंगी ;
मंज़िल से न जुड़ पाएंगी।
मृदु बयार इन्हें तुम देना ;
अदृश्य होकर भी थामे रहना।
साथ तुम्हारा मिला चले तो ;
मैं भी मंज़िल को छू लूंगी।
मेरे ह्रदय में तुम रह लेना ;
तेरे सपनों में मैं जी लूंगी।