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Saturday, March 21, 2015

माहिर

फेसबुक की इस दीवार पर छपे
चंद लफ़्ज़ों को देखकर ;
मेरे दोस्तों को लगा कि
कितने रोशन ज़ज़्बात हैं मेरे।
कैसे बेदाग़ अल्फ़ाज़ हैं मेरे।
लोगों को लगता रहा ;
मैं अपने ख्यालों में कितना ज़ाहिर हूँ।
काश!
कोई नज़्म ये भी बता पाता कि
खुद को छुपाने में
मैं उससे भी बड़ा माहिर हूँ।

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