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Saturday, April 19, 2014

मैं कौन हूँ ?

मैं कौन हूँ ?
क्या मैं एक नाम भर हूँ ?
जिसके सहारे ये दुनिया मुझे  पुकारती है
जिसके दस्तखत से स्वीकृति मिलती है मेरी
या जिससे पहचान होती है मेरी
लेकिन ये तो मेरा नाम है, मैं तो नहीं
फिर क्या मैं एक रिश्ता भर हूँ ?
किसी का पुत्र
किसी का भाई
या किसी का कुछ और
लेकिन ये सम्बन्ध हैं मेरे, मैं तो नहीं
फिर क्या मैं एक पद का नाम हूँ ?
अमुक संस्था का पदाधिकारी
किसी संस्थान का सदस्य
या कहीं का कर्ता-धर्ता
लेकिन ये तो स्थान हैं मेरे, मैं तो नहीं
फिर क्या मैं एक हुनर भर हूँ ?
कभी एक कवि
कभी एक लेखाकार
या कभी किसी फन का जानकार
लेकिन ये सब तो कौशल हैं मेरे, मैं तो नहीं
बार-बार यही सोचता हूँ की मैं कौन हूँ ?
ये शरीर, ये सम्बन्ध, ये नाम, या ये पहचान
बार-बार यही पाता हूँ की ये सब तो "मेरे" हैं
"मैं" तो नहीं
फिर वही  सवाल रह जाता है की
मैं कौन हूँ ?

Thursday, April 17, 2014

RUKHSAT

जब कभी मुझसे दूर जाने को जी चाहे तुम्हारा
तो मुझे चोट मत पहुँचाना
मुझसे मुँह मत फेर लेना
अजनबियों की तरह
न कभी मुझसे दो-चार होने से घबराना
इन बातों से
तकलीफ होगी तुम्हे
हँसना पड़ेगा तुम्हें ऊपर-ऊपर
मगर दिल में टीस होगी तुम्हे
मैं तो चंद बेजान लफ़्ज़ों के सहारे
ज़ाहिर कर दूँगा अपनी बेबसी
लेकिन तुम्हारी बेबसी
इसका ज़िक्र भी न करने देगी तुम्हे
जब कभी मुझसे दूर जाने को जी चाहे तुम्हारा
बस एक अलविदा भर कह देना मुझसे
हँसते - हँसते
मैं भी हँसते - हँसते तुम्हे रुख़सत कर दूंगा

Wednesday, April 16, 2014

अधिकार नहीं 
अख्तयार नहीं 
तुम्हारी कल्पना के भी पहरेदार नहीं 
हम तो तुम्हारी राहों  पे बिखर जाना चाहते हैं 
तुम में विलीन होकर संवर जाना चाहते हैं