कुछ इसे सज़ा मानते हैं ;
कुछ इसे मज़ा।
कुछ इसे फ़र्ज़ समझते हैं ;
कुछ इसे कर्ज़।
और कुछ तो इसे इस तरह जीते हैं ;
मानो औरों के लिए
मिसाल बना रहे रहे हों।
बस कुछ ही होते हैं ;
जो ज़िन्दगी को
ज़िन्दगी की तरह जीते हैं।
ना डर कर ;
ना मर कर।
ना किसी से लेकर ;
ना किसी को देकर।
बस पूरी तरह इसी के होकर।
कुछ इसे मज़ा।
कुछ इसे फ़र्ज़ समझते हैं ;
कुछ इसे कर्ज़।
और कुछ तो इसे इस तरह जीते हैं ;
मानो औरों के लिए
मिसाल बना रहे रहे हों।
बस कुछ ही होते हैं ;
जो ज़िन्दगी को
ज़िन्दगी की तरह जीते हैं।
ना डर कर ;
ना मर कर।
ना किसी से लेकर ;
ना किसी को देकर।
बस पूरी तरह इसी के होकर।