जब अँधेरा था दिल में मेरे ;
खुद को कभी न परख सका।
क्या भला क्या बुरा छिपा है ;
अपने ही भीतर नहीं दिखा।
जब तेरी नूर समायी अंदर ;
मेरा कुछ ना सगा रहा।
क्या अपना और कौन पराया ;
तेरा ही सब रचा लगा।
मैं ने छोड़ा साथ मेरा तब ;
जब तेरे हाथ का पता लगा।
क्या क्या जोड़ रखा था मैंने ;
अब तेरे दर पे लुटा रहा।
खुद था मैं या खुदा ही था ;
इसका भी ना इल्म मुझे।
अब तू मुझमे और मैं तुझमे ;
तेरे ही करतब दिखा रहा।
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