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Monday, September 1, 2014

माँ !

माँ !
तुम्हारी गोद में चढ़कर ऐसा लगता है
जैसे अपने दोनों हाथ बढाकर चाँद तारे छू लूँगी।
तुम्हारे होने की गरमाहट
कुछ इस तरह दिल में समा जाती है
की मुस्कान चेहरे को छोड़ने का नाम ही नहीं लेती।
तुम्हारे आँचल की छाँव ने इतना यकीन दिया कि
ज़िन्दगी में चाहे कैसी भी चिलचिलाती दुपहरी क्यों ना हो
तुम्हारे साथ की तरावट
मेरी शाम-ए-तासीर को हमेशा नम रखेगी।

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