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Thursday, September 10, 2020

करार

मेरे पास  कहानियाँ  हैं -
कुछ हँसाती,
कुछ गुदगुदाती,
कुछ जगजाहिर
और बहुत सारी मन में कुलबुलाती |
मैं खुद भी एक कहानी ही हूँ |
कभी आपको दिलचस्प लगता हूँ ;
तो कभी बोरियत भी देता हूँ |
और अक्सर मैं आपके लिए
कोई मायने ही नहीं रखता |
मगर मैं वो ज़्यादा हूँ ;
जो आपकी नज़रों के सामने होकर भी 
आपको नज़र नहीं आता |
और शायद मैं चाहता भी नहीं ;
कि आपकी समझ मे आऊँ कभी |
चलिये एक करार करते हैं हम दोनों आज -
मेरे होने को आप नकारते रहें 
और मैं आपकी मौजूदगी को इत्तेफाक मान लेता हूँ |

Saturday, January 18, 2020

दुश्वारी

जब तुम ही चले गए
तो दिल भारी भारी क्यूँ है ?
तुमसे था गुलज़ार वो चमन ख़ाक हो गया
तो जाने क्या फ़िक्र ये बेक़रारी क्यूँ है ?
फ़कत साँसें ही तो थी जो अब लुट गयी है
फिर कैसी है बेचैनी ये दुश्वारी क्यूँ है ?