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Tuesday, December 13, 2016

तृष्णा

जी भरकर था हँसना मुझको;
भर पेट था रो लेना।
आँसू से था तर हो लेना ;
आकंठ स्वपन में खो लेना।
प्रेम से था तृप्त भी होना ;
क्रोध की अग्नि से जलना।
पूर्णमेव तुमको पाना था ;
पूर्णतः तुमको खो देना।
थोड़ा थोड़ा जिया हमेशा ;
थोड़ा थोड़ा पिया किया।
एक बार ऐसा जीना है ;
एक बार ऐसा पीना।
चख़ लूँ मैं उस एक बूँद को ;
बचे ना कुछ भी जिया-पिया।