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Wednesday, May 25, 2016
हरगिज़
मैं तो जानता ही था कि बिछड़ना आस पास है;
तुमसे मन जुड़ने जो लगा था।
चाह कर भी तुम्हें मंज़िल ना बना पाता हरगिज़;
तुम्हारी ओर मुड़ने जो लगा था।
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