जब तुम ही चले गए
तो दिल भारी भारी क्यूँ है ?
तुमसे था गुलज़ार वो चमन ख़ाक हो गया
तो जाने क्या फ़िक्र ये बेक़रारी क्यूँ है ?
फ़कत साँसें ही तो थी जो अब लुट गयी है
फिर कैसी है बेचैनी ये दुश्वारी क्यूँ है ?
तो दिल भारी भारी क्यूँ है ?
तुमसे था गुलज़ार वो चमन ख़ाक हो गया
तो जाने क्या फ़िक्र ये बेक़रारी क्यूँ है ?
फ़कत साँसें ही तो थी जो अब लुट गयी है
फिर कैसी है बेचैनी ये दुश्वारी क्यूँ है ?