तड़प रहे हैं हम भी ;
तड़प रहे हैं वो भी।
जुदाई की कसक और
मिलने की तमन्ना ;
जितनी हमारी उतनी तुम्हारी।
खोल के जब दिल देखा उनका ;
ख़्वाहिश-ए-दीदार-ए-तस्वीर
जो थी उनकी ;
वही तस्वीर-ए-यार निकली हमारी।
फालतू रहा सदियों का ये जंग मेरे दोस्त।
जिन हाथों ने लिखी थी तुम्हारी किस्मत ;
उन्होंने ही बख़्शी तक़दीर हमारी।
तड़प रहे हैं वो भी।
जुदाई की कसक और
मिलने की तमन्ना ;
जितनी हमारी उतनी तुम्हारी।
खोल के जब दिल देखा उनका ;
ख़्वाहिश-ए-दीदार-ए-तस्वीर
जो थी उनकी ;
वही तस्वीर-ए-यार निकली हमारी।
फालतू रहा सदियों का ये जंग मेरे दोस्त।
जिन हाथों ने लिखी थी तुम्हारी किस्मत ;
उन्होंने ही बख़्शी तक़दीर हमारी।
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