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Thursday, April 17, 2014

RUKHSAT

जब कभी मुझसे दूर जाने को जी चाहे तुम्हारा
तो मुझे चोट मत पहुँचाना
मुझसे मुँह मत फेर लेना
अजनबियों की तरह
न कभी मुझसे दो-चार होने से घबराना
इन बातों से
तकलीफ होगी तुम्हे
हँसना पड़ेगा तुम्हें ऊपर-ऊपर
मगर दिल में टीस होगी तुम्हे
मैं तो चंद बेजान लफ़्ज़ों के सहारे
ज़ाहिर कर दूँगा अपनी बेबसी
लेकिन तुम्हारी बेबसी
इसका ज़िक्र भी न करने देगी तुम्हे
जब कभी मुझसे दूर जाने को जी चाहे तुम्हारा
बस एक अलविदा भर कह देना मुझसे
हँसते - हँसते
मैं भी हँसते - हँसते तुम्हे रुख़सत कर दूंगा

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