INTELLECT
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Wednesday, April 16, 2014
अधिकार नहीं
अख्तयार नहीं
तुम्हारी कल्पना के भी पहरेदार नहीं
हम तो तुम्हारी राहों पे बिखर जाना चाहते हैं
तुम में विलीन होकर संवर जाना चाहते हैं
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