जुबां ख़ामोश हो गयी है।
ऑंखें पथरा गयी हैं।
कान तो कब के बहरे हो गए थे।
थोड़ी सोच ही थी जो बाकी रह गयी थी।
अब उस अक्ल पर भी पर्दा डाल दो।
इस झूठ के कफ़न को बनाये रखने के लिए
कि "सब कुछ ठीक है"
हर उस झरोखे को बंद कर दो
जिनसे होकर आने वाली हवा से
मुर्दा हो चुका सच कहीं साँसे न लेने लग जाए।
तुम बंद ही रखना हमें यूँ ही
क्यूंकि हमारे खोखलेपन में
सच्चाई को हज़म करने की कुब्बत ही नहीं रही है।
ऑंखें पथरा गयी हैं।
कान तो कब के बहरे हो गए थे।
थोड़ी सोच ही थी जो बाकी रह गयी थी।
अब उस अक्ल पर भी पर्दा डाल दो।
इस झूठ के कफ़न को बनाये रखने के लिए
कि "सब कुछ ठीक है"
हर उस झरोखे को बंद कर दो
जिनसे होकर आने वाली हवा से
मुर्दा हो चुका सच कहीं साँसे न लेने लग जाए।
तुम बंद ही रखना हमें यूँ ही
क्यूंकि हमारे खोखलेपन में
सच्चाई को हज़म करने की कुब्बत ही नहीं रही है।
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