कहते हैं की जो याद रहती है
वो चीज़ पुरानी हो जाती है।
मुझे याद मत रखना।
मेरी तस्वीर में
कोई रंग मत भरना।
कोरा, सादा और
जितना हो सके निराकार ;
मेरी छवि बिलकुल धुमिल रखना।
मुझे पूर्णता तुम्हारे रंगों से मिलेगी।
मेरी आवाज़ तुम्हारे छंदों से गूंजेगी।
सांस तुम लोगे और ज़िन्दगी मुझे मिलेगी।
खुश तुम होगे और मुस्कान मेरी खिलेगी।
तुम बस रहना वैसे ही
जैसे तुम सदा रहे हो-
शाश्वत और नैसर्गिक।
मेरी मौजूदगी तुम्हारे शख्शियत में
और तुम्हारा अस्तित्व फिर मेरे व्यक्तित्व में
हमेशा ज़िंदा रहेंगें।
वो चीज़ पुरानी हो जाती है।
मुझे याद मत रखना।
मेरी तस्वीर में
कोई रंग मत भरना।
कोरा, सादा और
जितना हो सके निराकार ;
मेरी छवि बिलकुल धुमिल रखना।
मुझे पूर्णता तुम्हारे रंगों से मिलेगी।
मेरी आवाज़ तुम्हारे छंदों से गूंजेगी।
सांस तुम लोगे और ज़िन्दगी मुझे मिलेगी।
खुश तुम होगे और मुस्कान मेरी खिलेगी।
तुम बस रहना वैसे ही
जैसे तुम सदा रहे हो-
शाश्वत और नैसर्गिक।
मेरी मौजूदगी तुम्हारे शख्शियत में
और तुम्हारा अस्तित्व फिर मेरे व्यक्तित्व में
हमेशा ज़िंदा रहेंगें।
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