मैं घूमना चाहता हूँ
तुम्हारे साथ
खुले आसमाँ के नीचे
तारों भरी रात में।
समन्दर की लहरों के पीछे
धीरे-धीरे ओझल होते
सूरज को निहारना चाहता हूँ।
पहाड़ों की सुदूर चोटियों से
आभामय करते सुबह की किरण को
बिखरते देखना चाहता हूँ।
तुम्हारे सपनों के बारे में
सुनना चाहता हूँ।
अपने अरमानों के बारे में
बताना चाहता हूँ।
तुम्हें विश्वास दिलाना चाहता हूँ ;
कि 'तुम' और 'मैं' बड़े आराम से
'हम' हो सकते हैं।
बिना एक दूजे को बाँधे भी
परवाह की जा सकती है -
ये बात समझाना चाहता हूँ।
तुम्हारी छोटी-छोटी खुशियों में
खुश होना चाहता हूँ।
तुम्हें अपने सब्र का फल
बनाना चाहता हूँ।
और कुछ नहीं
सिर्फ और सिर्फ
तुम्हें चाहता हूँ।
तुम्हारे साथ
खुले आसमाँ के नीचे
तारों भरी रात में।
समन्दर की लहरों के पीछे
धीरे-धीरे ओझल होते
सूरज को निहारना चाहता हूँ।
पहाड़ों की सुदूर चोटियों से
आभामय करते सुबह की किरण को
बिखरते देखना चाहता हूँ।
तुम्हारे सपनों के बारे में
सुनना चाहता हूँ।
अपने अरमानों के बारे में
बताना चाहता हूँ।
तुम्हें विश्वास दिलाना चाहता हूँ ;
कि 'तुम' और 'मैं' बड़े आराम से
'हम' हो सकते हैं।
बिना एक दूजे को बाँधे भी
परवाह की जा सकती है -
ये बात समझाना चाहता हूँ।
तुम्हारी छोटी-छोटी खुशियों में
खुश होना चाहता हूँ।
तुम्हें अपने सब्र का फल
बनाना चाहता हूँ।
और कुछ नहीं
सिर्फ और सिर्फ
तुम्हें चाहता हूँ।
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